Siyasat
Mera qalaam mitakar, waqt
apni daastaan likh raha hai;
Surkh khayal chhodkar ab shayar ,
tajurbey se seekh raha hai.
Sochta hoon nazm chhodkar,
likhoon logon ki kismat.
Ab bazaar mein rubai kahaan?
Siyaasi naara bik raha hai.
Tere girne se, na tu,
na duniya hi sharminda hai.
Chupchaap sab ne maan liya hai;
Zameer, tu kyon cheekh raha?
Mujhe neelaam karke zamana,
mera imaan utaar kar le gaya.
Yoon ungli na utha mujhpe;
tu bhi nanga dikh raha hai.
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मेरा क़लाम मिटाकर,
वक़्त अपनी दास्ताँ लिख रहा है;
सुर्ख़ ख़याल छोड़कर अब शायर,
तजुर्बे से सीख रहा है।
सोचता हूँ, नज़्म छोड़कर,
लिखूं लोगों कि किस्मत;
अब बाज़ार में रुबाई कहाँ?
सियासी नारा बिक रहा है।
तेरे गिरने से न तू,
ना दुनिया ही शर्मिंदा है।
चुपचाप सबने मान लिया है
ज़मीर, तू क्यों चीख रहा है?
मुझे नीलाम करके ज़माना,
मेरा ईमान उतार कर ले गया,
यूँ ऊँगली न उठा मुझ पर,
तू भी नंगा दिख रहा है।
सियासत
मेरा क़लाम मिटाकर,
वक़्त अपनी दास्ताँ लिख रहा है;
सुर्ख़ ख़याल छोड़कर अब शायर,
तजुर्बे से सीख रहा है।
सोचता हूँ, नज़्म छोड़कर,
लिखूं लोगों कि किस्मत;
अब बाज़ार में रुबाई कहाँ?
सियासी नारा बिक रहा है।
तेरे गिरने से न तू,
ना दुनिया ही शर्मिंदा है।
चुपचाप सबने मान लिया है
ज़मीर, तू क्यों चीख रहा है?
मुझे नीलाम करके ज़माना,
मेरा ईमान उतार कर ले गया,
यूँ ऊँगली न उठा मुझ पर,
तू भी नंगा दिख रहा है।
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